Yes Bank का शेयर 12% से ज्यादा टूटा, कमजोर तिमाही नतीजों से बढ़ा दबाव – Yes Bank Share Price tanks over 12 per cent as higher provisions drag Q3 profit down


Yes Bank Share Price : प्राइवेट सेक्टर के लेंडर यस बैंक का शेयर सोमवार, 23 जनवरी को बीएसई पर इंट्राडे में 12 फीसदी से ज्यादा कमजोर होकर 17.35 रुपये पर आ गया। दरअसल, लोन्स के लिए किए गए प्रोविजन के चलते दिसंबर तिमाही में बैंक के नेट प्रॉफिट में 80 फीसदी की कमी दर्ज की गई। बैंक का नेट प्रॉफिट एक साल पहले की समान तिमाही के 266 करोड़ रुपये की तुलना में घटकर 52 करोड़ रुपये रह गया। यस बैंक का नॉन टैक्स प्रोविजन 845 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 125 फीसदी और तिमाही आधार पर 45 फीसदी ज्यादा था।

पूर्वाह्न 11.10 बजे Yes Bank का शेयर लगभग 9 फीसदी कमजोर होकर 18.05 रुपये पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, बीते एक साल में शेयर लगभग 35 फीसदी मजबूत हो चुका है।

नेट इंटरेस्ट इनकम में बढ़ोतरी

हालांकि, बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) एक साल पहले की अवधि की 1,764 करोड़ रुपये से बढ़कर दिसंबर, 2022 में समाप्त तिमाही में 1,970.6 करोड़ रुपये हो गई है। इसका मतलब है कि सालाना आधार पर इसमें 11.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं, तिमाही आधार पर बैंक के NII में कुछ खास फर्क नहीं पड़ा है, जो पिछली तिमाही में 1991 करोड़ रुपये रही थी।

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ब्रोकरेज ने घटाया टारगेट प्राइस

विदेशी ब्रोकरेज मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) ने यस बैंक के शेयर के लिए टारगेट प्राइस 20 रुपये से घटाकर 17.5 रुपये कर दिया। साथ ही उसे ‘अंडरवेट’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने कहा, “एआरसी की बिक्री/ कैपिटल जुटाने से बैलेंसशीट में सुधार हुआ है और नियमों के चलते अग्रिम प्रोविजन किया जा रहा है।” ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 23/24/25 के लिए अर्निंग प्रति शेयर एस्टीमेंट 37 फीसदी/7 फीसदी/5 फीसदी तक घटा दिया है।

एटी1 बॉन्ड केस में भी लगा झटका

एक अन्य घटनाक्रम में, बंबई हाई कोर्ट ने यस बैंक के मार्च 2020 के 8,415 करोड़ रुपये एडीशनल टियर 1 (एटी1) बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डालने के फैसले को खारिज कर दिया, लेकिन लेंडर को इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 6 हफ्ते का समय दिया है। ये बॉन्ड होल्डर्स पिछले तीन साल से कई मोर्चों पर कानूनी जंग लड़ रहे हैं।

AT1 बॉन्ड्स एक तरह की सिक्योरिटीज होती हैं जिनकी कोई मैच्योरिटी अवधि नहीं होती है। बैंक इन्हें बेसिल-3 नॉर्म्स को पूरा करने के उद्देश्य से पूंजी जुटाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

फ्रॉड, वित्तीय अनियमितताओं और एनपीए से जूझते हुए मार्च 2020 में बेलआउट के तहत 8415 करोड़ रुपये के एटी1 बॉन्ड्स को राइट ऑफ कर दिया था यानी कि इसकी वैल्यू जीरो कर दी थी।

डिस्क्लेमरः यहां दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह निवेश विशेषज्ञों के अपने निजी विचार और राय होते हैं। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

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